नाटक हैमलेट का विषय
विलियम शेक्सपियर का हैमलेट अंग्रेज़ी साहित्य की सबसे महत्वपूर्ण और प्रसिद्ध त्रासदियों में से एक है। यह नाटक, जो 1600 के आसपास लिखा गया था, मानव स्वभाव, भावनाओं और जीवन की जटिलताओं को दर्शाने वाले विभिन्न विषयों की खोज करता है। ये विषय आज भी प्रासंगिक हैं और पाठकों व दर्शकों को प्रभावित करते हैं। नीचे हैमलेट के मुख्य विषयों का सरल और स्पष्ट भाषा में विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है।
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1. प्रतिशोध (Revenge)
प्रतिशोध का विषय हैमलेट का मुख्य आधार है। पूरा कथानक प्रिंस हैमलेट के अपने पिता की हत्या का बदला लेने की कोशिश के इर्द-गिर्द घूमता है। राजा हैमलेट का भूत उसे अपनी हत्या के बारे में सच्चाई बताता है, जिससे हैमलेट बदला लेने के लिए प्रेरित होता है। लेकिन हैमलेट का निर्णय लेने में संकोच और चिंतन बदले की प्रक्रिया को देरी कर देता है, जिससे और भी जटिलताएं पैदा होती हैं।
अन्य पात्र भी प्रतिशोध की भावना से प्रेरित हैं। उदाहरण के लिए, लेअर्टीस अपने पिता पोलोनियस और बहन ओफेलिया की मौत का बदला लेना चाहता है। यह हैमलेट की स्थिति के समानांतर चलता है। शेक्सपियर प्रतिशोध के विनाशकारी प्रभाव को उजागर करते हैं। यह न्याय लाने के बजाय अराजकता, मृत्यु और पीड़ा को जन्म देता है।
आलोचनात्मक विश्लेषण:
टी.एस. इलियट जैसे आलोचकों का मानना है कि हैमलेट पूरी तरह से प्रतिशोध त्रासदी नहीं है क्योंकि हैमलेट का संकोच उसे विशिष्ट बनाता है। ए.सी. ब्रैडली के अनुसार, हैमलेट अपने पिता का बदला लेने में देरी करता है क्योंकि वह चिंतनशील और दार्शनिक स्वभाव का है।
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2. पागलपन (Madness)
नाटक में पागलपन का विषय बार-बार उभरता है, चाहे वह असली हो या नकली। हैमलेट अपने पिता की हत्या की सच्चाई जानने और दूसरों को धोखा देने के लिए पागल होने का नाटक करता है। लेकिन उसका व्यवहार अक्सर वास्तविकता और दिखावे के बीच की रेखा को धुंधला कर देता है, जिससे दर्शक उसकी मानसिक स्थिति पर सवाल उठाते हैं।
दूसरी ओर, ओफेलिया का पागलपन वास्तविक है। अपने पिता की मृत्यु और हैमलेट के अस्वीकार के बाद, वह मानसिक रूप से अस्थिर हो जाती है, जिससे उसकी दुखद मृत्यु होती है। शेक्सपियर पागलपन के माध्यम से यह दिखाते हैं कि शोक, विश्वासघात और हानि मानव मन को कैसे प्रभावित कर सकते हैं।
आलोचनात्मक विश्लेषण:
हेरोल्ड ब्लूम का मानना है कि हैमलेट का पागलपन उसके आंतरिक संघर्ष और बौद्धिक परेशानियों को व्यक्त करने का एक तरीका है। वहीं, ओफेलिया का पागलपन अक्सर महिलाओं की सीमित स्वतंत्रता पर एक टिप्पणी के रूप में देखा जाता है। नारीवादी आलोचक बताते हैं कि ओफेलिया का पागलपन उसके उत्पीड़न और उसके जीवन पर नियंत्रण की कमी का परिणाम है।
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3. मृत्यु और नश्वरता (Death and Mortality)
हैमलेट में मृत्यु एक प्रमुख विषय है। नाटक की शुरुआत राजा हैमलेट की मृत्यु से होती है और अंत में हैमलेट, गर्ट्रूड, क्लॉडियस और लेअर्टीस सहित कई पात्रों की मृत्यु के साथ समाप्त होती है। मृत्यु की निरंतर उपस्थिति पात्रों को उनकी नश्वरता का सामना करने के लिए मजबूर करती है।
हैमलेट का प्रसिद्ध एकालाप, “To be or not to be,” जीवन और मृत्यु पर उसके गहरे विचारों को दर्शाता है। वह सवाल करता है कि क्या जीवन के दुखों को सहना बेहतर है या मृत्यु के माध्यम से इसे समाप्त करना। मृत्यु का विषय कब्रिस्तान के दृश्य में और भी स्पष्ट होता है, जहां हैमलेट योरिक की खोपड़ी पकड़कर मृत्यु की अनिवार्यता पर विचार करता है।
आलोचनात्मक विश्लेषण:
दार्शनिक फ्रेडरिक नीत्शे के अनुसार, हैमलेट अस्तित्व संबंधी प्रश्नों पर आधारित एक नाटक है। जीवन और मृत्यु पर हैमलेट का चिंतन अस्तित्ववाद के विचारों से मेल खाता है। अन्य आलोचक, जैसे स्टीफन ग्रीनब्लैट, तर्क देते हैं कि यह नाटक उस युग की मृत्यु और परलोक के बारे में चिंताओं को दर्शाता है।
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4. भ्रष्टाचार और पतन (Corruption and Decay)
भ्रष्टाचार का विषय पूरे नाटक में स्पष्ट है। क्लॉडियस के शासन के तहत डेनमार्क को एक बीमार और सड़ते हुए राज्य के रूप में वर्णित किया गया है। वाक्यांश “Something is rotten in the state of Denmark” नैतिक और राजनीतिक भ्रष्टाचार का प्रतीक है जिसने राज्य को प्रभावित किया है।
क्लॉडियस के कार्य, जैसे राजा हैमलेट की हत्या, सत्ता और महत्वाकांक्षा के भ्रष्ट प्रभाव को दर्शाते हैं। यह भ्रष्टाचार अन्य पात्रों तक फैलता है, जिससे विश्वासघात, छल और मृत्यु होती है।
आलोचनात्मक विश्लेषण:
आलोचक विल्सन नाइट क्लॉडियस को एक सक्षम शासक मानते हैं, लेकिन उनका अपराध नैतिक व्यवस्था को अस्थिर कर देता है। पूरे नाटक में सड़न और बीमारी की छवियां, जैसे जहर वाली तलवारें और पेय, भ्रष्टाचार के परिणामों का प्रतीक हैं। शेक्सपियर इस विषय के माध्यम से दिखाते हैं कि नैतिक पतन व्यक्तियों और समाजों को कैसे नष्ट कर सकता है।
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5. दिखावा बनाम वास्तविकता (Appearance vs Reality)
हैमलेट में दिखावे और वास्तविकता के बीच का अंतर एक महत्वपूर्ण विषय है। कई पात्र अपने असली इरादों को छिपाने के लिए एक नकाब पहनते हैं। क्लॉडियस एक दयालु और प्रेमपूर्ण राजा प्रतीत होता है, लेकिन वास्तव में वह एक हत्यारा है। पोलोनियस खुद को बुद्धिमान और वफादार दिखाते हैं, लेकिन वह चालाक और हस्तक्षेपकारी हैं।
हैमलेट खुद धोखे का सहारा लेता है और पागलपन का नाटक करता है। वह जो देखता और सुनता है, उसकी सच्चाई पर लगातार संदेह करता है, जिसमें भूत का खुलासा भी शामिल है। यह विषय इस बात को उजागर करता है कि झूठ और धोखे से भरी दुनिया में सच्चाई और भ्रम के बीच भेद करना कितना कठिन है।
आलोचनात्मक विश्लेषण:
आलोचक सैमुअल जॉनसन का मानना है कि दिखावा बनाम वास्तविकता का विषय मानव स्वभाव की जटिलताओं को दर्शाता है। पात्रों का छल जीवन की अनिश्चितता और अस्पष्टता को दर्शाता है।
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6. महिलाएं और लैंगिक भूमिकाएं (Women and Gender Roles)
हैमलेट में महिलाओं का चित्रण उस समय की लैंगिक भूमिकाओं और अपेक्षाओं को दर्शाता है। दो मुख्य महिला पात्र, गर्ट्रूड और ओफेलिया, पुरुषों के साथ उनके संबंधों से परिभाषित होती हैं। गर्ट्रूड को क्लॉडियस से जल्दी शादी करने के लिए आलोचना का सामना करना पड़ता है, जबकि ओफेलिया को उसके पिता और भाई द्वारा नियंत्रित किया जाता है।
ओफेलिया का दुखद भाग्य एक पितृसत्तात्मक समाज में महिलाओं की सीमित विकल्पों को उजागर करता है। गर्ट्रूड के चरित्र में वफादारी, नैतिकता और मातृत्व की जिम्मेदारी पर सवाल खड़े होते हैं।
आलोचनात्मक विश्लेषण:
नारीवादी आलोचक जैसे एलेन शोवाल्टर का तर्क है कि ओफेलिया का पागलपन पुरुष वर्चस्व के खिलाफ उनकी बगावत का प्रतीक है। गर्ट्रूड, जिसे अक्सर कमजोर माना जाता है, को आधुनिक आलोचकों द्वारा एक व्यावहारिक विकल्प बनाने वाली उत्तरजीवी के रूप में पुनः व्याख्या किया गया है।
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7. भाग्य और स्वतंत्र इच्छा (Fate and Free Will)
भाग्य और स्वतंत्र इच्छा के बीच का तनाव हैमलेट में एक और महत्वपूर्ण विषय है। जबकि नाटक की कुछ घटनाएं पूर्व निर्धारित लगती हैं, जैसे भूत का बदला लेने का आदेश, हैमलेट के चुनाव और कार्य कहानी के पाठ्यक्रम को आकार देते हैं।
हैमलेट इस विचार से संघर्ष करता है कि क्या वह केवल भाग्य का मोहरा है या अपने भाग्य पर उसका नियंत्रण है। यह आंतरिक संघर्ष उसके एकालापों में स्पष्ट है, जहां वह अपने निर्णयों के परिणामों पर बहस करता है।
आलोचनात्मक विश्लेषण:
आलोचक कॉलरिज हैमलेट को भाग्य और स्वतंत्र इच्छा के बीच फंसा हुआ पात्र मानते हैं। उसका संकोच और आत्म-चिंतन दिखाता है कि वह पूरी तरह से भाग्य से बंधा नहीं है।
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निष्कर्ष
हैमलेट के विषय जैसे प्रतिशोध, पागलपन, मृत्यु, भ्रष्टाचार और मानव स्वभाव की जटिलताएं कालातीत मुद्दों की खोज करते हैं। शेक्सपियर की उत्कृष्ट भाषा और चित्रण इन विषयों को जीवंत बनाते हैं, जिससे यह नाटक गहराई और विचारशीलता से भरपूर बनता है।
यह नाटक नैतिकता, पहचान और अस्तित्व के सवालों को संबोधित करता है, जिससे यह आज भी दर्शकों और पाठकों को प्रभावित करता है।

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