डैनियल डेफ़ो (Daniel Defoe) द्वारा 1719 में रचित Robinson Crusoe अंग्रेज़ी साहित्य का एक अत्यंत प्रभावशाली novel है, जिसे अक्सर realistic fiction की शुरुआत माना जाता है। इस महान कृति का मूल शीर्षक The Life and Strange Surprizing Adventures of Robinson Crusoe है और यह एक काल्पनिक autobiography के रूप में लिखी गई है। यह कहानी न केवल एक व्यक्ति के survival के संघर्ष को दर्शाती है, बल्कि economic individualism, colonialism और religious conversion जैसे गहन विषयों को भी उजागर करती है।
वास्तविक जीवन की प्रेरणा: Alexander Selkirk
क्रूसो की कहानी का मुख्य आधार स्कॉटिश नाविक Alexander Selkirk के वास्तविक अनुभव माने जाते हैं। सेल्किर्क चिली के तट के पास स्थित Más a Tierra नामक द्वीप पर चार साल से अधिक समय तक marooned रहे थे। जहाँ सेल्किर्क ने चार साल अकेले बिताए, वहीं डेफ़ो ने अपने protagonist के द्वीप प्रवास को 28 वर्षों तक बढ़ा दिया ताकि कहानी अधिक रोमांचक और शिक्षाप्रद बन सके। सेल्किर्क और क्रूसो के बीच कई समानताएँ हैं, जैसे कि जंगली बकरियों (goats) को पालना और भाषा के कौशल को बनाए रखने के लिए Bible पढ़ना।
क्रूसो का प्रारंभिक जीवन और विद्रोह
रॉबिन्सन क्रूसो का जन्म 1632 में यॉर्क (York) शहर के एक प्रतिष्ठित middle-class परिवार में हुआ था। उसके पिता, जो एक विदेशी व्यापारी थे, चाहते थे कि क्रूसो Law की पढ़ाई करे और एक सुरक्षित "Middle State" का जीवन जिए। क्रूसो के पिता ने उसे चेतावनी दी थी कि यदि वह घर छोड़कर समुद्र की यात्राओं पर जाएगा, तो वह दुनिया का सबसे दुखी व्यक्ति बनेगा। हालाँकि, क्रूसो के मन में बचपन से ही rambling thoughts और समुद्र के प्रति गहरा आकर्षण था। अपने पिता की सलाह को अनसुना करना ही क्रूसो का "Original Sin" माना जाता है, जिसने उसे जीवन भर दुखों और संघर्षों की ओर धकेला।
प्रारंभिक समुद्री यात्राएँ और गुलामी
क्रूसो ने 1651 में हल (Hull) शहर से अपनी पहली समुद्री यात्रा शुरू की। पहली ही यात्रा में उसे भयानक समुद्री तूफान (storm) का सामना करना पड़ा, जहाँ उसने भगवान से माफी माँगी और घर लौटने का वादा किया। लेकिन तूफान शांत होते ही वह अपने वादे भूल गया और शराब पीकर अपनी अंतरात्मा (conscience) को दबा दिया।
इसके बाद की एक यात्रा में उसे Salé pirates ने पकड़ लिया और वह दो साल तक एक Moor का गुलाम बनकर रहा। क्रूसो ने बड़ी चतुराई से एक नाव चुराई और एक लड़के, Xury, के साथ वहाँ से भाग निकला। समुद्र में उन्हें एक उदार Portuguese Captain ने बचाया, जिसने क्रूसो को ब्राजील (Brazil) पहुँचाने में मदद की। ब्राजील में क्रूसो ने अपनी एक Sugar Plantation शुरू की और वह काफी धनी हो गया। लेकिन अधिक संपत्ति और slaves प्राप्त करने की लालच में उसने अफ्रीका की एक खतरनाक यात्रा पर जाने का निर्णय लिया।
विनाशकारी Shipwreck और द्वीप पर आगमन
30 सितंबर 1659 को, ब्राजील से निकलने के कुछ समय बाद, एक भयानक hurricane ने उनके जहाज को नष्ट कर दिया। जहाज के सभी लोग डूब गए और केवल क्रूसो ही जीवित बचा, जो एक सुनसान द्वीप पर पहुँच गया जिसे उसने "Island of Despair" कहा।
द्वीप पर पहुँचने के बाद क्रूसो का पहला कार्य जहाज के मलबे से ज़रूरी सामान निकालना था। उसने एक raft बनाई और ग्यारह बार जहाज पर जाकर ammunition, tools, food, arms, Bible और अन्य रसद इकट्ठा की। उसने रहने के लिए एक सुरक्षित fortress बनाया, जिसके चारों ओर उसने stakes की एक मज़बूत दीवार खड़ी की। समय का हिसाब रखने के लिए उसने एक लकड़ी के खंभे पर हर दिन एक निशान लगाना शुरू किया, जो उसका calendar बना।
Island Life: उद्योग, कृषि और धर्म
क्रूसो ने द्वीप पर अपने जीवन को अत्यंत व्यवस्थित तरीके से व्यवस्थित किया। उसने barley और rice की खेती करना सीखा। उसने जंगली बकरियों को पकड़कर पालतू बनाया ताकि उसे मांस और दूध मिल सके। उसने मलबे से मिले औजारों से मेज़, कुर्सी और टोकरियाँ (baskets) बनाईं।
क्रूसो का आचरण मैक्स वेबर (Max Weber) के Protestant Ethic और Spirit of Capitalism को दर्शाता है। वह एक "diligent laborer" था, जिसने अपनी मेहनत से प्राकृतिक संसाधनों को अपनी property में बदल दिया।
द्वीप पर अकेलेपन और एक गंभीर बीमारी (ague) के दौरान क्रूसो का spiritual transformation हुआ। उसने भगवान के अस्तित्व और न्याय पर विचार किया और Bible पढ़ते हुए अपने पुराने पापों के लिए पश्चाताप (repentance) किया। उसने महसूस किया कि उसका द्वीप पर बचना कोई संयोग नहीं, बल्कि भगवान की Providence थी।
Man Friday: उपनिवेशवाद और दासता
द्वीप पर लगभग 15 साल रहने के बाद क्रूसो ने समुद्र तट पर एक naked footprint देखा, जिससे वह अत्यंत भयभीत हो गया। उसे पता चला कि वहाँ cannibals (आदमखोर) आते हैं जो अपने कैदियों को मारकर खाते हैं।
कई वर्षों के डर के बाद, क्रूसो ने एक कैदी को इन राक्षसों से बचाया और उसका नाम Friday रखा। फ्राइडे और क्रूसो का रिश्ता एक विशिष्ट master-servant relationship था। क्रूसो ने उसे अंग्रेज़ी सिखाई, उसे कपड़े पहनाए और उसे Christianity में परिवर्तित किया। आलोचक इस रिश्ते को Colonialism और Imperialism के रूप में देखते हैं, जहाँ एक यूरोपीय व्यक्ति एक "Savage" को सभ्य बनाने का प्रयास करता है।
मुक्ति और इंग्लैंड वापसी
द्वीप पर अपने 27वें वर्ष में, क्रूसो ने एक अंग्रेज़ी जहाज देखा जहाँ mutiny (विद्रोह) हुई थी। क्रूसो ने जहाज के Captain की मदद की और विद्रोहियों को हराकर जहाज को वापस पाने में सफलता हासिल की। कप्तान ने धन्यवाद के रूप में क्रूसो और फ्राइडे को इंग्लैंड पहुँचाया। क्रूसो ने द्वीप पर कुल 28 साल, 2 महीने और 19 दिन बिताए थे।
वापस लौटने पर क्रूसो को पता चला कि उसकी ब्राजील की plantation से उसे अपार wealth प्राप्त हुई है। अपनी अंतिम यात्रा में, उसने पुर्तगाल से इंग्लैंड तक का सफर ज़मीनी रास्ते से तय किया, जहाँ उसने पाइरेनीज़ (Pyrenees) के पहाड़ों में भूखे भेड़ियों (wolves) का सामना किया। अंततः वह इंग्लैंड में बस गया, विवाह किया और उसके तीन बच्चे हुए।
उपन्यास की विरासत और विश्लेषण
Robinson Crusoe केवल एक साहसिक कहानी नहीं है, बल्कि यह मानव सहनशक्ति और विश्वास का प्रतीक है। इस उपन्यास ने Robinsonade नामक एक नए genre को जन्म दिया, जिसने The Swiss Family Robinson और Gulliver's Travels जैसी कृतियों को प्रभावित किया।
उत्तर-औपनिवेशिक (post-colonial) दृष्टि से जे.एम. कोएट्जी (J.M. Coetzee) ने अपने उपन्यास Foe में इस कहानी को दोबारा पेश किया है, जहाँ फ्राइडे की आवाज़ को दबाने और यूरोपीय श्रेष्ठता के दावों पर सवाल उठाए गए हैं। 18वीं शताब्दी में इस पुस्तक को बच्चों के लिए नैतिक शिक्षा के रूप में भी बहुत महत्व दिया गया, विशेष रूप से जॉन लॉक (John Locke) और रूसो (Rousseau) के शैक्षिक सिद्धांतों के संदर्भ में।
निष्कर्षतः, क्रूसो की कहानी एक ऐसे व्यक्ति की है जो अपने विद्रोह, विनाश, एकांत और अंततः आत्म-खोज के माध्यम से एक नया जीवन प्राप्त करता है।

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