अब्सर्ड साहित्य (Absurd Literature) का हिन्दी अनुवाद:
अब्सर्ड (विसंगत) साहित्य:
यह शब्द उन अनेक नाट्य एवं गद्य कृतियों पर लागू होता है, जिनकी मूल धारणा यह है कि मानव स्थिति मूल रूप से अब्सर्ड (विसंगत/अर्थहीन) है, और इस स्थिति को केवल उन्हीं साहित्यिक कृतियों में उपयुक्त रूप से दर्शाया जा सकता है जो स्वयं भी अब्सर्ड हों। अब्सर्डता की भावना और नाट्यशैली का संकेत 1896 में अल्फ्रेड जैरी के फ्रेंच नाटक यूबू रॉय (Ubu Roi) में पहले ही मिल चुका था। यह साहित्य अभिव्यक्तिवाद (Expressionism) और अतियथार्थवाद (Surrealism) आंदोलनों से भी प्रभावित रहा, साथ ही फ्रांज काफ्का की 1920 के दशक की रचनाओं (द ट्रायल, मेटामॉर्फोसिस) से भी जुड़ता है।
हालाँकि यह साहित्यिक आंदोलन द्वितीय विश्व युद्ध (1939-45) की विभीषिका के बाद फ्रांस में उभरा, जिसने पारंपरिक संस्कृति और साहित्य की मूल धारणाओं के विरुद्ध विद्रोह के रूप में जन्म लिया। पारंपरिक साहित्य का यह विश्वास था कि मनुष्य एक तर्कसंगत प्राणी है, जो एक कुछ हद तक समझने योग्य ब्रह्मांड में रहता है; कि वह एक सुव्यवस्थित सामाजिक ढाँचे का हिस्सा है; और कि वह पराजय में भी गरिमा और वीरता बनाए रख सकता है।
1940 के बाद एक व्यापक प्रवृत्ति उभरी—विशेष रूप से अस्तित्ववाद (Existentialism) के दर्शन में—जिसमें लेखक जैसे जाँ-पॉल सार्त्र और अल्बर्ट कामू मानते थे कि मनुष्य एक ऐसा अकेला अस्तित्व है जिसे एक अजनबी ब्रह्मांड में फेंक दिया गया है; यह मान्यता कि मानव जीवन में कोई अंतर्निहित सत्य, मूल्य या अर्थ नहीं है। जीवन को एक निरर्थक यात्रा के रूप में दर्शाया गया, जो शून्यता से आरंभ होकर शून्यता की ओर बढ़ती है।
कामू ने द मिथ ऑफ सिज़िफस (1942) में लिखा:
"एक ऐसा ब्रह्मांड जो अचानक भ्रम और रोशनी से वंचित हो गया है, उसमें मनुष्य स्वयं को अजनबी महसूस करता है। यह निर्वासन अपरिवर्तनीय है... मनुष्य और उसके जीवन, अभिनेता और उसके मंच के बीच यह अलगाव ही वास्तव में अब्सर्डता की अनुभूति को जन्म देता है।"
फ्रेंच लेखक यूजीन योंनेस्को (The Bald Soprano - 1949, The Lesson - 1951) ने कहा:
"धार्मिक, दार्शनिक और आध्यात्मिक जड़ों से कट जाने पर मनुष्य खो जाता है, उसके सभी कार्य अर्थहीन, अब्सर्ड और निष्फल हो जाते हैं।"
उन्होंने आगे कहा:
"जो लोग निरर्थकता में डूबे हुए हैं वे केवल विकृत (grotesque) हो सकते हैं, उनके कष्ट केवल उपहासपूर्वक ही दुखद प्रतीत हो सकते हैं।"
सैमुएल बैकेट (1906–1989), इस शैली के सबसे प्रमुख और प्रभावशाली लेखक थे। वे आयरलैंड में जन्मे थे पर पेरिस में रहते थे, और अक्सर फ्रेंच में लिखते और स्वयं अंग्रेजी में अनुवाद करते थे। उनके नाटक जैसे Waiting for Godot (1954) और Endgame (1958) जीवन की निरर्थकता, विवेकहीनता और असहायता को दर्शाते हैं। ये नाटक यथार्थवादी मंचन, तर्कसंगतता और पारंपरिक कथानक संरचना को अस्वीकार करते हैं।
Waiting for Godot में दो भिखारी जैसे पात्र एक उजाड़ स्थान में एक ऐसे व्यक्ति का इंतज़ार करते हैं (गोडो), जो शायद अस्तित्व में ही नहीं है। उनमें से एक कहता है:
“कुछ नहीं होता, कोई नहीं आता, कोई नहीं जाता, यह भयानक है।”
यह नाटक दोहरे अर्थ में अब्सर्ड है — यह हास्यात्मक रूप से विकृत है और तर्कहीन एवं निष्फल भी। यह पश्चिमी संस्कृति की पारंपरिक मान्यताओं का ही नहीं, बल्कि पारंपरिक नाटक की शैलियों और स्वयं अपने नाट्य-माध्यम का भी पैरोडी (व्यंग्यात्मक अनुकरण) करता है।
बैकेट की गद्य कृतियाँ जैसे Malone Dies (1958) और The Unnamable (1960) एक ऐसे ‘एंटी-हीरो’ को दर्शाती हैं जो सभ्यता के अंतिम खेल (Endgame) की निरर्थक चालें चलता है, जहाँ भाषा का भी विघटन होता है। फिर भी, बैकेट के पात्र जीवन में अर्थ खोजने का प्रयास करते हैं, चाहे वह अर्थहीन ही क्यों न हो।
अन्य प्रमुख लेखक:
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ज्यां जेने (Jean Genet) — जिनके नाटकों में अब्सर्डता और शैतानियत का मेल है।
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हेरॉल्ड पिंटर (अंग्रेज़) और एडवर्ड एल्बी (अमेरिकी) के कुछ शुरुआती नाटक इसी शैली में हैं।
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टॉम स्टॉपर्ड के प्रारंभिक नाटक जैसे Rosencrantz and Guildenstern Are Dead (1966) और Travesties (1974) अब्सर्ड तकनीकों का उपयोग हास्य के लिए करते हैं।
ब्लैक कॉमेडी (काले हास्य) के साथ समानताएँ:
इनमें भी अब्सर्डता और त्रासदी मिश्रित होती है। उदाहरण:
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जोसेफ हेलर की Catch-22 (1961)
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थॉमस पिंचन की V (1963)
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कर्ट वोनगट, जूनियर, जॉन बार्थ, और गुंटर ग्रास के उपन्यास
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फिल्म: स्टेनली क्यूब्रिक की Dr. Strangelove (1964)
राजनीतिक विरोध में उपयोग:
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चेक लेखक वैक्लाव हावेल का Largo Desolato (1987)
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दक्षिण अफ्रीकी लेखक एथोल फुगार्ड, जॉन कानी, और विंस्टन न्टशोना का The Island (1973)
संदर्भ ग्रंथ:
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Martin Esslin, The Theatre of the Absurd (1968)
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David Grossvogel, The Blasphemers (1965)
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Arnold Hinchliffe, The Absurd (1969)
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Max Schultz, Black Humor Fiction of the Sixties (1980)
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Brater & Cohn, eds., Around the Absurd (1990)
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Neil Cornwell, The Absurd in Literature (2006)
संबंधित प्रविष्टियाँ:
विट (wit), हास्य (humor), और हास्य-नाटक (the comic)।
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