जस्टिस – जॉन गाल्सवर्दी द्वारा (एक्ट-वार सारांश)
परिचय:
"जस्टिस" ब्रिटिश नाटककार जॉन गाल्सवर्दी द्वारा लिखित एक सशक्त सामाजिक नाटक है, जिसे 1910 में लिखा गया था। यह नाटक न्याय प्रणाली की कठोरता और अमानवीयता की तीव्र आलोचना करता है। नाटक का मुख्य पात्र विलियम फाल्डर है, एक युवा क्लर्क, जो एक दुखी महिला की मदद करने के लिए एक चेक में हेराफेरी करता है और इसी एक गलती के कारण उसकी ज़िंदगी पूरी तरह बर्बाद हो जाती है। यह नाटक पांच अंकों में बँटा हुआ है, और प्रत्येक अंक ब्रिटिश न्याय प्रणाली के विभिन्न पहलुओं को उजागर करता है – कानून, समाज और नैतिकता के बीच के टकराव को।
अंक 1: जेम्स और वॉल्टर हाउ का कार्यालय
यहाँ रुथ हनीविल का प्रवेश होता है – एक विवाहित महिला जो फाल्डर से प्रेम करती है। रुथ बताती है कि उसका पति हिंसक और निर्दयी है और वह उससे बचकर अपने बच्चों के साथ एक नई ज़िंदगी शुरू करना चाहती है। फाल्डर, उसकी मदद के लिए बेचैन होकर, फर्म की चेकबुक में छेड़छाड़ करता है – वह नौ पाउंड की राशि को बदलकर नब्बे पाउंड कर देता है और चेक को नकद करवाकर रुथ के साथ भागने की योजना बनाता है।
हालांकि यह जालसाज़ी जल्दी ही पकड़ी जाती है और जब फाल्डर से पूछा जाता है, तो वह टूट जाता है और अपना अपराध स्वीकार कर लेता है। वॉल्टर हाउ उसके इरादों को समझते हैं और सहानुभूति रखते हैं, लेकिन उनके चाचा जेम्स हाउ कानून के कठोर पक्ष का प्रतिनिधित्व करते हैं और मुकदमा चलाने पर अड़े रहते हैं।
मुख्य विषय:
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कानून बनाम नैतिकता का संघर्ष
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मजबूरी में अपराध
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संवेदनहीन न्याय प्रणाली
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व्यक्ति बनाम संस्था
अंक 2: अदालत का दृश्य
दूसरा अंक कोर्टरूम में स्थित है, जहाँ फाल्डर पर जालसाज़ी का मुकदमा चल रहा है। यह दृश्य गंभीर, औपचारिक और नीरस
वातावरण को दर्शाता है, जो कानून की कठोरता को उजागर करता है।
बचाव पक्ष यह साबित करने की कोशिश करता है कि फाल्डर ने यह कार्य लोभ में नहीं, बल्कि रुथ की मदद करने की नीयत से किया। रुथ की गवाही से यह स्पष्ट होता है कि फाल्डर का उद्देश्य मानवीय था।
हालांकि, अभियोजन पक्ष केवल कानूनी तथ्य पर ज़ोर देता है – कानून का उल्लंघन हुआ है, इसलिए अपराध सिद्ध है, चाहे कारण कुछ भी हो। जज भी कहता है कि व्यक्तिगत परिस्थितियाँ कानून के तहत अपराध को वैध नहीं बना सकतीं।
अंततः फाल्डर को तीन साल की सजा दी जाती है। रुथ टूट जाती है, और फाल्डर को जेल भेज दिया जाता है।
मुख्य विषय:
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कानून की कठोरता
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भावनाओं की अनदेखी
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अपराध बनाम उद्देश्य
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न्याय प्रक्रिया की क्रूरता
अंक 3: जेल
जेल अधीक्षक और कर्मचारी केवल नियमों के पालन पर ज़ोर देते हैं। फाल्डर के पत्र रोके जाते हैं, भावनाओं की अभिव्यक्ति पर रोक होती है। धीरे-धीरे उसका मानसिक संतुलन बिगड़ने लगता है और उसे अकेले कोठरी (सॉलिटरी कन्फाइनमेंट) में डाल दिया जाता है।
कोक्सन, जो फर्म में मुख्य क्लर्क थे, उससे मिलने जेल आते हैं और दुख जताते हैं, लेकिन वे भी व्यवस्था के आगे असहाय हैं।
मुख्य विषय:
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जेल प्रणाली की अमानवीयता
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मानसिक पीड़ा और अकेलापन
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पुनर्वास की विफलता
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मनुष्य को 'कैदी संख्या' बना देने की प्रवृत्ति
अंक 4: परिवीक्षा समिति की बैठक
चौथा अंक उस समय को दिखाता है जब फाल्डर सजा काटने के बाद परिवीक्षा समिति (प्रोबेशन बोर्ड) के सामने पेश होता है। वह समाज में दोबारा प्रवेश करने की कोशिश करता है।
फाल्डर अब मानसिक और शारीरिक रूप से कमजोर हो चुका है। वह अपराध के लिए पछताता है, लेकिन समाज उसे स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं है। वॉल्टर हाउ उसका समर्थन करते हैं, लेकिन अन्य लोग उसे एक अपराधी के रूप में देखते हैं।
अंततः उसे औपचारिक रूप से समाज में लौटने की अनुमति दी जाती है, लेकिन यह केवल प्रक्रिया भर लगती है – असल में समाज उसे नहीं अपनाता।
मुख्य विषय:
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अपराधी को दूसरा मौका देने में समाज की हिचक
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पुनर्स्थापन की असफलता
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समाज का पूर्वाग्रह
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दोषी ठहराया जाना सज़ा से परे
अंक 5: दुखद अंत
अंतिम अंक अत्यंत मार्मिक और दुखद है। फाल्डर अब जेल से बाहर है, लेकिन उसकी ज़िंदगी निरंतर अस्वीकृति और अकेलेपन से घिरी हुई है। हर जगह उसे नकारा जाता है – नौकरी, समाज, और यहाँ तक कि रुथ भी अब उससे नहीं जुड़ पाती।
वह गहरे अवसाद और मानसिक पीड़ा से घिरा रहता है। उसे लगता है कि कोई उसका पीछा कर रहा है, कि वह कभी अपनी पिछली ज़िंदगी से मुक्त नहीं हो पाएगा।
आख़िरकार, वह सीढ़ियों से कूदकर आत्महत्या कर लेता है। यह एक करुण दृश्य है जो दर्शाता है कि समाज न केवल अपराध को सज़ा देता है, बल्कि अपराधी को जीवनभर के लिए बहिष्कृत कर देता है।
कोक्सन दुखी होकर सोचते हैं कि हमने एक इंसान को खो दिया – सिर्फ इसलिए क्योंकि हमारे कानून में दया नहीं है।
मुख्य विषय:
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सामाजिक बहिष्कार और मानसिक दबाव
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आत्महत्या के पीछे की सामाजिक ज़िम्मेदारी
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क्षमा और पुनः अवसर का अभाव
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मानवता बनाम प्रणाली
निष्कर्ष:
जॉन गाल्सवर्दी का नाटक जस्टिस केवल एक अपराध की कहानी नहीं है, यह एक करुणापूर्ण चीख़ है – एक ऐसी व्यवस्था के खिलाफ जो केवल कानून के शब्दों को मानती है, लेकिन इंसानियत की भावना को नजरअंदाज कर देती है।
विलियम फाल्डर का अपराध उसकी परिस्थिति की उपज था, न कि कोई आपराधिक मनोवृत्ति। लेकिन व्यवस्था ने उसे अपराधी घोषित कर उसकी आत्मा को मार डाला। इस नाटक में गाल्सवर्दी यह सवाल उठाते हैं कि – क्या न्याय केवल सज़ा देना है, या किसी को सुधारने और समझने की प्रक्रिया भी है?
यह नाटक आज भी उतना ही प्रासंगिक है जितना उस दौर में था। "जस्टिस" हमें सोचने पर मजबूर करता है कि क्या हमारा न्याय वास्तव में न्यायपूर्ण है?



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