✍️ अंग्रेजी साहित्य के दो महत्वपूर्ण आयाम: ब्लैंक वर्स और ब्लूम्सबरी समूह
🔹 ब्लैंक वर्स: अंग्रेजी कविता की स्वाभाविक ध्वनि
ब्लैंक वर्स (Blank Verse) अंग्रेजी कविता का एक महत्वपूर्ण छंद है जिसमें पंक्तियाँ आईऐंबिक पेंटामीटर में होती हैं—अर्थात प्रत्येक पंक्ति में पाँच यमक मात्राएँ होती हैं—लेकिन इन पंक्तियों का कोई तुकांत नहीं होता। इसे ही "ब्लैंक" (अर्थात् 'रिक्त') कहा जाता है, क्योंकि इसमें तुक नहीं होता।
यह छंद शैली अंग्रेजी भाषा की प्राकृतिक लय के सबसे निकट मानी जाती है, इसलिए यह भाषाई प्रवाह और गंभीर अभिव्यक्ति के लिए अत्यंत उपयुक्त है। इसका आरंभ 16वीं शताब्दी में अर्ल ऑफ सरे ने वर्जिल की The Aeneid के अंग्रेजी अनुवाद में किया था।
बाद में यह शैली एलिज़ाबेथीय युग और फिर आधुनिक युग के कई प्रसिद्ध कवियों द्वारा अपनाई गई।
जॉन मिल्टन की महाकाव्य रचना Paradise Lost,
विलियम वर्ड्सवर्थ की Prelude,
अल्फ्रेड लॉर्ड टेनीसन की Idylls of the King,
रॉबर्ट ब्राउनिंग, टी. एस. एलियट और वॉलेस स्टीवंस जैसे कवियों ने इसे अपनाकर अमर काव्य रचनाएँ प्रस्तुत कीं।
ब्लैंक वर्स की एक विशेषता यह है कि यह "वर्स पैराग्राफ्स" के रूप में विभाजित होती है—जहाँ कविता को अनुच्छेदों में बांटा जाता है। उदाहरण के लिए, मिल्टन की Paradise Lost की शुरुआती 26 पंक्तियाँ या वर्ड्सवर्थ की Tintern Abbey की पहली 22 पंक्तियाँ इस प्रकार की संरचना को दर्शाती हैं।
Tintern Abbey से एक उदाहरण:
पाँच साल बीत गए; पाँच ग्रीष्म,
उतने ही लंबे पाँच जाड़े! और फिर मैं सुनता हूँ
इन जलधाराओं को, जो पर्वतों से बहती हैं
एक मृदु अंत:स्पंदन के साथ।
🔹 ब्लूम्सबरी समूह: विचारों और रचनात्मकता का संगम
ब्लूम्सबरी समूह (Bloomsbury Group) 20वीं सदी की शुरुआत में लंदन के ब्लूम्सबरी क्षेत्र में उभरा एक अनौपचारिक बुद्धिजीवी समूह था। इसमें लेखक, कलाकार, आलोचक, अर्थशास्त्री और दार्शनिक शामिल थे, जो कला, नैतिकता, साहित्य और जीवन के मूल्यों पर चर्चा करते थे।
इस समूह के सदस्य विक्टोरियन युग की संकीर्णता और परंपरावादी दृष्टिकोण का विरोध करते थे।
प्रमुख सदस्य थे:
- वर्जीनिया वूल्फ (प्रसिद्ध उपन्यासकार)
- ई. एम. फॉर्स्टर
- चित्रकार डंकन ग्रांट और वनेसा बेल (वूल्फ की बहन)
- कला समीक्षक क्लाइव बेल, रोजर फ्राई
- जीवनी लेखक लाइटन स्ट्रेची
- अर्थशास्त्री जॉन मेनार्ड कीन्स
ब्लूम्सबरी समूह के सदस्य केवल साहित्यिक या बौद्धिक दृष्टिकोण से ही नहीं, बल्कि निजी संबंधों के स्तर पर भी एक-दूसरे से गहराई से जुड़े थे—कई बार ये संबंध जटिल और व्यक्तिगत रूप से संवेदनशील होते थे।
प्रथम विश्व युद्ध के बाद यह समूह साहित्यिक नवाचार और कलात्मक स्वतंत्रता का प्रतीक बन गया। इसके प्रभाव को आज भी आधुनिक विचारधाराओं, कला शैलियों और लिंग-अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता में महसूस किया जा सकता है।
इस समूह के इतिहास पर दो महत्वपूर्ण पुस्तकें हैं:
- Bloomsbury: A House of Lions (क्वेंटिन बेल द्वारा)
- Bloomsbury Recalled (लियोन एडेल द्वारा)
✨ निष्कर्ष
चाहे वह ब्लैंक वर्स की मुक्त और लयबद्ध कविता हो या ब्लूम्सबरी समूह की नवोन्मेषी सोच, दोनों ने अंग्रेजी साहित्य को एक नई दिशा देने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है। एक ओर जहां ब्लैंक वर्स ने कविता को भाषाई बंधनों से मुक्त किया, वहीं दूसरी ओर ब्लूम्सबरी समूह ने सामाजिक और बौद्धिक सीमाओं को तोड़कर नए विचारों को जन्म दिया।
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