The Mob
The Mob (1914) is a four-act social drama written by the English author and playwright John Galsworthy. Composed in 1913, just prior to the outbreak of World War I, the play serves as a pointed critique of Edwardian imperialism and the overwhelming pressure of mass emotion during wartime.
The narrative centers on Stephen More, an idealistic Member of Parliament and Under-Secretary of State. The play begins on a July evening at More's London town house, where he declares his intention to speak in Parliament against his country's impending war with a smaller, independent nation. Despite fierce opposition from his wife, Katherine, and her military family—including her father, General Sir John Julian, and her brother, Captain Hubert Julian—More delivers a speech condemning the war as a "national cynicism" and an unjust attack on a free people.
The central theme of the play is the conflict between individual moral conviction and collective patriotic pressure. Galsworthy characterizes "the mob" not merely as a physical crowd, but as a symbol of irrational mass emotion that suppresses dissent and free speech once "war fever" has taken hold. As the conflict progresses and casualties mount, More becomes a pariah, facing escalating hostility from the press, his constituents, and his own family.
Ultimately, The Mob is an exploration of the tragedy of uncompromising idealism. It portrays the high personal cost of remaining faithful to one's principles when they clash with popular sentiment, leading to More’s eventual isolation and violent end at the hands of the very people he sought to represent. The play concludes with a posthumous recognition of his sacrifice, symbolized by a statue in a London square inscribed with the words: "Faithful to his ideal".
यहाँ जॉन गल्सवर्दी (John Galsworthy) के नाटक "The Mob" (1914) का विस्तृत विवरण दिया गया है। यह नाटक Edwardian Imperialism और युद्ध के दौरान उत्पन्न होने वाली Mass Emotion की एक गंभीर आलोचना है,।
नाटक का परिचय (Introduction)
The Mob चार अंकों (Four Acts) में लिखा गया एक Social Drama है। यह नाटक एक आदर्शवादी सांसद (Member of Parliament) Stephen More की कहानी है, जो अपने देश द्वारा एक छोटे राष्ट्र के विरुद्ध छेड़े गए युद्ध का विरोध करता है। गल्सवर्दी ने इस नाटक के माध्यम से Individual Conscience (व्यक्तिगत विवेक) और Collective Patriotic Pressure (सामूहिक देशभक्ति के दबाव) के बीच के संघर्ष को दर्शाया है,।
मुख्य पात्र (Main Characters)
- Stephen More: मुख्य नायक, एक आदर्शवादी राजनेता और Under-Secretary of State,।
- Katherine More: Stephen की पत्नी, जो अपने पति और अपने सैन्य परिवार के प्रति वफादारी के बीच फंसी हुई है,।
- General Sir John Julian: Katherine के पिता, जो युद्ध को राष्ट्र का सम्मान मानते हैं,।
- Captain Hubert Julian: Katherine का भाई, जो मोर्चे पर लड़ने जाता है,।
- Olive: Stephen और Katherine की छोटी बेटी,।
- The Mob: भीड़, जो इस नाटक में Irrational Mass Emotion (तर्कहीन सामूहिक भावना) का प्रतीक है,।
अंक और दृश्य अनुसार सारांश (Act and Scene wise Summary)
Act I: द डिनर पार्टी (The Dinner Party)
नाटक की शुरुआत जुलाई की एक शाम को Stephen More के लंदन स्थित घर के डाइनिंग रूम में होती है,। मेज पर Stephen के अलावा उसके ससुर Sir John, Dean of Stour, Edward Mendip और उसकी पत्नी Katherine बैठे हैं।
- Conflict (संघर्ष): यहाँ एक छोटे राष्ट्र के खिलाफ युद्ध की संभावना पर तीखी बहस चल रही है। Stephen इसे National Cynicism (राष्ट्रीय सनक) और कमजोरों पर अत्याचार मानता है,।
- Stephen का निर्णय: वह घोषणा करता है कि वह उसी रात संसद (Parliament) में इस युद्ध के खिलाफ भाषण देगा। Mendip उसे चेतावनी देता है कि यह Political Lunacy (राजनीतिक पागलपन) है और उसे अपना करियर दांव पर नहीं लगाना चाहिए,।
- पारिवारिक दबाव: Katherine उसे अपने भाइयों और पिता का वास्ता देती है जो सेना में हैं, लेकिन Stephen अपने Conscience (विवेक) के प्रति अडिग रहता है। वह कहता है कि वह केवल तब तक किसी सिद्धांत को नहीं मान सकता जब तक वह लोकप्रिय हो।
- युद्ध की घोषणा: अंत में खबर आती है कि युद्ध शुरू हो चुका है और ब्रिटिश सेना सीमा पार कर चुकी है,। इसके बावजूद, Stephen संसद जाकर अपना विरोध प्रकट करता है।
Act II: जनमत का दबाव (Public Pressure)
कुछ दिन बीत चुके हैं और युद्ध में ब्रिटिश सेना को एक शुरुआती हार (Reverse) का सामना करना पड़ा है,।
- The Deputation (प्रतिनिधिमंडल): Stephen के चुनाव क्षेत्र (Constituency) से कुछ लोग (Banning, Shelder, आदि) उससे मिलने आते हैं। वे उसे चेतावनी देते हैं कि युद्ध शुरू होने के बाद देश के खिलाफ बोलना Anti-Patriotic है।
- अटल आदर्शवाद: प्रतिनिधिमंडल उसे चुप रहने (Muzzling order) के लिए कहता है, लेकिन Stephen अपना इस्तीफा (Resignation) दे देता है और कहता है कि वह अन्याय के खिलाफ बोलना जारी रखेगा,।
- Mob का उदय: खिड़की के बाहर से गुजरती सेना की टुकड़ी और जयकारे लगाती भीड़ को देखकर Stephen महसूस करता है कि जनमत पूरी तरह उसके खिलाफ हो चुका है।
Act III, Scene I: सभा का विरोध (Disruption of Meeting)
यह दृश्य एक उपनगरीय थिएटर के पीछे की गली में होता है। Stephen एक युद्ध-विरोधी सभा (Stop-the-War Meeting) को संबोधित कर रहा है।
- भीड़ का हिंसक रूप: जैसे ही Stephen बाहर आता है, एक उग्र भीड़ उसे घेर लेती है। लोग उसे Traitor (देशद्रोही) और Black-leg कहकर पुकारते हैं,।
- साहस का परिचय: भीड़ उस पर पत्थर और कचरा फेंकती है, लेकिन वह शांत खड़ा रहता है। वह कहता है कि ये जनजातियाँ केवल अपने घर की रक्षा कर रही हैं। अंत में भीड़ थोड़ी शांत होकर तितर-बितर हो जाती है, लेकिन नफरत बरकरार रहती है।
Act III, Scene II: पारिवारिक विच्छेद (Domestic Separation)
यह दृश्य Katherine के बेडरूम में होता है। वह गहरी मानसिक पीड़ा में है।
- Katherine का समझौता: Katherine, Stephen से विनती करती है कि वह अपने अभियान को रोक दे। वह उसे अपनी मोहब्बत का वास्ता देती है और इसे एक Bargain (सौदा) की तरह पेश करती है।
- नैतिक पतन का डर: Stephen इसे अपनी आत्मा को बेचने जैसा मानता है। उसे लगता है कि अगर वह प्यार के लिए अपने सिद्धांतों को छोड़ देगा, तो वह खुद की नजरों में गिर जाएगा।
- जुदाई: अंततः Katherine तय करती है कि वह उसके साथ नहीं रह सकती,। वह अपनी बेटी Olive को लेकर अपने पिता के घर चली जाती है,।
Act IV: बलिदान (The Sacrifice)
युद्ध अपने चरम पर है और खबर आती है कि Katherine का भाई Hubert मारा गया है,।
- अंतिम टकराव: Stephen पूरी तरह अकेला हो चुका है। नौकर भी घर छोड़कर जा चुके हैं। तभी एक बड़ी देशभक्त भीड़ उसके घर में घुस आती है।
- भीड़ का न्याय: भीड़ उसे मेज पर खड़ा कर भाषण देने को कहती है और उसका मजाक उड़ाती है। Stephen उन्हें Contemptible (घृणित) कहता है और उनके अंधे राष्ट्रवाद की निंदा करता है।
- शहादत: बहस के बीच एक उत्तेजित लड़की Boy Scout's knife से Stephen पर हमला कर देती है,। Stephen गिर जाता है और उसकी मृत्यु हो जाती है। भीड़ अचानक डर कर भाग जाती है। अंत में एक छात्र उसके शव पर यूनियन जैक (Union Jack) रख देता है और कहता है, "उसने हार नहीं मानी"।
उपसंहार: आफ्टरमैथ (Aftermath)
नाटक एक Epilogue के साथ समाप्त होता है। कई वर्षों बाद, एक सार्वजनिक चौक में Stephen More की एक मूर्ति दिखाई जाती है। उस पर लिखा है: "Faithful to his ideal" (अपने आदर्श के प्रति वफादार),। यह दर्शाता है कि जिस समाज ने उसे जीवित रहते मार दिया, उसी ने बाद में उसे एक संत की तरह सम्मान दिया।
मुख्य विषय (Key Themes)
- Tragedy of Uncompromising Idealism: सिद्धांतों पर अडिग रहने की भारी व्यक्तिगत कीमत चुकानी पड़ती है,।
- Mob Mentality: भीड़ तर्कहीन होती है और वह अक्सर सत्य की आवाज को दबा देती है,।
- Freedom of Speech: युद्ध के समय अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और असहमति को अक्सर देशद्रोह मान लिया जाता है,।
- The Irony of Patriotism: Stephen का मानना है कि सच्ची देशभक्ति अन्याय का विरोध करने में है, न कि उसे बढ़ावा देने में,।
यह नाटक हमें याद दिलाता है कि जब समाज अपने विवेक को त्याग देता है, तो वह अपने सबसे ईमानदार नागरिकों को ही कुचल देता है।

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